सुनते हैं उम्मीद पर दुनिया कायम है
वैसे, उम्मीद का क्या है .?..
कहीं भी लगा लीजिये , कमबख्त लग जाती है
खैर तो उसकी नहीं जिससे ये लगायी जाती है
अरे ! लगाने से पहले पूछ तो लिया होता,
बेचारा , खरा उतरा तो भला हो उसका ,
जो निकला नाउम्मीदा तो कहेंगे ,
निकम्मा नाकारा !
लगा कर खुद से सिर्फ उम्मीद
खरे उतरो उन्हीं पर ही..
झांको तो अपना गिरेबान ही बहुत है
उम्मीदें तो ऐसी हों ...
न औरों की तुमसे ना तुम्हारी किसी से हों .
~~शर्मिला~~
वैसे, उम्मीद का क्या है .?..
कहीं भी लगा लीजिये , कमबख्त लग जाती है
खैर तो उसकी नहीं जिससे ये लगायी जाती है
अरे ! लगाने से पहले पूछ तो लिया होता,
बेचारा , खरा उतरा तो भला हो उसका ,
जो निकला नाउम्मीदा तो कहेंगे ,
निकम्मा नाकारा !
लगा कर खुद से सिर्फ उम्मीद
खरे उतरो उन्हीं पर ही..
झांको तो अपना गिरेबान ही बहुत है
उम्मीदें तो ऐसी हों ...
न औरों की तुमसे ना तुम्हारी किसी से हों .
~~शर्मिला~~